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The Blog-Health-o-Meter™ reads This blog is on fire!.
Crunchy numbers
A Boeing 747-400 passenger jet can hold 416 passengers. This blog was viewed about 4,500 times in 2010. That’s about 11 full 747s.
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The busiest day of the year was October 7th with 111 views. The most popular post that day was Mata Bheemeshwari Devi.
Where did they come from?
The top referring sites in 2010 were en.wordpress.com, google.co.in, khatushyamji.wordpress.com, translate.google.co.in, and shots.snap.com.
Some visitors came searching, mostly for beri wali mata, beri mata, bheemeshwari devi, maa beri wali, and नवरात्रि mantra.
Attractions in 2010
These are the posts and pages that got the most views in 2010.
Mata Bheemeshwari Devi September 2009
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Beri Wali Mata September 2009
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Fair (Beri ka Mela) September 2009
7 comments
Durga Chalisa & Aarti September 2009
1 comment
Mantra September 2009
9 comments

January 3, 2011 at 7:21 am
Sabhi ko naye sal ki subhkamnayen…(Happy New Year All of You…)
March 2, 2011 at 10:23 am
एक समय था जब भारतीय संस्कृति में 365 त्योहार हुआ करते थे। दूसरे शब्दों में हर दिन उत्सव मनाने के लिए उन्हें बस एक बहाने की जरूरत होती थी। जीवन के अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर ये 365 त्योहार मनाए जाते थे। पर महाशिवरात्रि का अपना अलग ही महत्व है।
कृष्ण पक्ष में हरेक चंद्र मास का चौदहवाँ दिन या अमावस्या से एक दिन पूर्व शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। एक पंचांग वर्ष में होने वाली सभी बारह शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि जो फरवरी-मार्च के महीने में पड़ती है सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इस रात्रि में इस ग्रह के उत्तरी गोलार्थ की दशा कुछ ऐसी होती है कि मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से ऊर्जा ऊपर की ओर चढ़ती है।
यह एक ऐसा दिन होता है जब प्रकृति व्यक्ति को उसके आध्यात्मिक शिखर की ओर ढकेल रही होती है। इसका उपयोग करने के लिए इस परंपरा में हमने एक खास त्योहार बनाया है जो पूरी रात मनाया जाता है। पूरी रात मनाए जाने वाले इस त्योहार का मूल मकसद यह निश्चित करना है कि ऊर्जाओं का यह प्राकृतिक चढ़ाव या उमाड़ अपना रास्ता पा सके।
वे लोग जो अध्यात्म मार्ग पर हैं उनके लिए महाशिवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण है। योग परंपरा में शिव की पूजा ईश्वर के रूप में नहीं की जाती बल्कि उन्हें आदि गुरु माना जाता है, वे प्रथम गुरु हैं जिनसे ज्ञान की उत्पति हुई थी। कई हजार वर्षों तक ध्यान में रहने के पश्चात एक दिन वे पूर्णतः शांत हो गए, वह दिन महाशिवरात्रि का है। उनके अंदर कोई गति नहीं रह गई और वे पूर्णतः निश्चल हो गए। इसलिए तपस्वी महाशिवरात्रि को निश्चलता के दिन के रूप में मनातें हैं।
पौराणिक कथाओं के अलावा योग परंपरा में इस दिन और इस रात को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि महाशिवरात्रि एक तपस्वी व जिज्ञासु के समक्ष कई संभावनाएँ प्रस्तुत करती है। आधुनिक विज्ञान कई अवस्थाओं से गुजरने के बाद आज एक ऐसे बिंदु पर पहुँचा है जहाँ वे यह सिद्ध कर रहे हैं कि हर चीज जिसे आप जीवन के रूप में जानते हैं, वह सिर्फ ऊर्जा है, जो स्वयं को लाखों करोड़ों रूप में व्यक्त करती है।
April 27, 2011 at 12:57 pm
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी,
तृतीयं चंद्रघण्टेति कुष्माण्डेती चतुर्थकम।।
पंचम स्कन्दमातेति षष्ठमं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टम।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता।
April 27, 2011 at 12:58 pm
सर्वमंगमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते।
April 27, 2011 at 12:59 pm
मंगल प्राप्ति के लिए
सर्वमंगमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते।
मंत्र जप संख्या 10000, हवन संख्या 3100, हवन सामग्री- घृत, कमल गट्टा।
मोक्ष प्राप्ति के लिए
त्वं वैष्णवो शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्ति हेतु:।।
मंत्र जप संख्या 2100, हवन संख्या 101, हवन सामग्री- घृत।
भक्ति की प्राप्ति के लिए
नतेभ्य: सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।
मंत्र जप संख्या 5000, हवन संख्या 2100, हवन सामग्री- घृत, मधु।
महामारी विनाश हेतु
जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपलिनी।।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
मंत्र जप संख्या 2100, हवन संख्या 1000, हवन सामग्री- घृत, चंदन।
ND
* विपत्ति नाश के लिए
शरणागतदीनार्थपरित्राण परायणे।
सर्वस्तयार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते।।
मंत्र जप संख्या 5000, हवन स. 1000, हवन सामग्री – घृत।
शत्रु विनाश के लिए
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरी।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरी विनाशनम्।।
मंत्र जप संख्या 10000, हवन संख्या 5000, हवन सामग्री- काली मिर्च, घृत।
भय नाश के लिए
सर्वस्वरूपे सर्वज्ञे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयैभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते।।
मंत्र जप संख्या 5000, हवन संख्या 2100, हवन सामग्री- घृत।
सर्वबाधा निवारण हेतु
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।
मंत्र जप संख्या 5000, हवन संख्या 1100, हवन सामग्री-सरसों व घृत।
मनोनुकूल पत्नी हेतु
पत्नी मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणी दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्भवाम्।।
August 11, 2011 at 10:46 am
Mata ji Says,
Tu wo ktra h jo tu chahta h,
hota wo h jo mei chahti hu,
tu wo kr jo mei chahti hu,
hoga wo jo tu chahta h.
Jai Mata Di……..
August 17, 2011 at 8:21 pm
Jai Mata Di
Saanche Darbar Ki Jai
Sachiyan Jotan Vaali Mata Teri Sadaa Hee Jai
Unche Pahado wali Mata Teri Sadaa Hee Jai
Bol Saanchey Darbar Ki Jai
Garb jun waliMata Teri Sadaa Hee Jai
Sarvatra Da Bhalaa Karan Vaali Mata Teri Sadaa Hee Jai
Sare Sansaar Vich Shanti Deyn Vaali Mata Teri Sada Hee Jai
August 17, 2011 at 8:22 pm
Jai Ambe Jai Jai Durge Dayamayi Kalyana Karo…
Aajao Maa Aajao Aakar daras dikha jao…
Jai Ambe…
Kab ke Dwar tihare thade maiya meri mujhpar kripa karo.
Jai Ambe…
Tere daras kay pyase naina daras humme dikhla jao
Jai Ambe…
September 28, 2011 at 11:01 am
Happy Navratre…..